ऐसा भी होता है !
जिसने भी सुना वो
दंग रह गया.श्री मोहन के साथ ऐसा हो गया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी .
श्री मोहन एक बैंक में अधिकारी थे और एक ऋण विशेषीकृत शाखा के शाखा प्रबंधक भी थे
.उनके ऊपर क्षेत्रीय प्रबंधक की भी विशेष
कृपा थी .हो भी क्यों ना ,आखिर दूध देने वाली गाय थी .श्री मोहन की सेटिंग
क्षेत्रीय प्रबंधक के साथ बहुत बढ़िया थी ,उनकी शाखा को ऋण बजट के टारगेट भी जरूरत
से ज्यादा दिए गए थे ताकि अधिक से अधिक ऋण हों और प्रबंधक तथा क्षेत्रीय प्रबंधक
की आमदनी भी .यह वह समय था जब एक ट्रक ऋण पर लगभग रु १००००/-की अतिरिक्त आमदनी
शाखा प्रबंधक कर सकता था .यही १००००/- क्षेत्रीय प्रबंधक एवं शाखा प्रबंधक के बीच
में बटा करते थे .श्री मोहन की शाखा से धड़ाधड़ ट्रक लोन हो रहे थे और पूरे शहर में यह चर्चा आम
थी कि चाहे जैसा भी ट्रक लोन करवाना हो तो
श्री मोहन की शाखा से करवाया जा सकता है . श्री मोहन,पैसा कमाने के चक्कर
में,परिवार का ,अपने स्वास्थ्य आदि का भी कोई होश नहीं रहा था .इसी दौरान उनकी
पत्नी ने नोटिस किया की उनकी भूख कुछ कम हो गयी है .पहले श्री मोहन चार रोटी खाते
थे अब वो दूसरी रोटी पर भी ना नुकुर करने लगे थे .टोकने पर बोले की तुम्हे वहम हो
गया है ,आजकल काम की चिंता ज्यादा है ,इसलिए भूख थोडा कम लग रही है .एक दिन जब
श्री मोहन की पत्नी उनके अन्तः वस्त्र धो रही थी तो देखा कि उनके अंडरवियर और
बनियान बिलकुल पीले हो गए थे .यह तो चिंता का विषय था ,उनको पीलिया (Jaundice) हो
गया था .श्री मोहन को जब बताया तो उनका जवाब था “ ये कोई लाइलाज बीमारी तो है नहीं
,इसका इलाज हो जाएगा ,ज्यादा चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है .”उनकी सोच में यह
था कि पैसे से सब कुछ हो सकता है यदि आदमी के पास पैसा हो तो सब कुछ संभव है .पैसे
से ही आदमी की इज्जत है और आने वाली पीढियां भी खुशहाल रहती हैं .अभी तो वक्त है पैसा
कमाने का .पहले खूब पैसा कमा लिया जाए बाद में सब देखा जयेगा.
एक दिन लगभग दोपहर के १२ बजे ,बैंक का चपरासी
घर में भागा भागा आया ,और बताया की साहब ऑफिस में बेहोश होकर गिर गए हैं .पत्नी
बेचारी जवान बेटे को साथ लेकर ऑफिस पहुंची और एम्बुलेंस बुलाकर उनको शहर के सबसे
बड़े हॉस्पिटल में दाखिल करवा दिया गया .डॉक्टरों की टीम ने उनका निरीक्षण करने के
बाद बताया कि इनका jaundice लास्ट स्टेज पर आ गया है अर्थात उनको लीवर सिरोसिस हो
गया था ,इनके लीवर ने बिलकुल काम करना बंद कर दिया है ,इनको तुरंत दिल्ली ले जाइये
.एक टैक्सी में तुरंत उनको दिल्ली ले जाया गया और वहां के नामी हॉस्पिटल में भर्ती
करवा दिया गया जहां पर . सभी रिश्तेदार,बेटियां ,दामाद आदि यहाँ हॉस्पिटल में
पहुँच चुके थे . यहाँ पर भी उनकी हालत में बहुत सुधार नहीं हुआ और तीन दिनों के
उपरान्त उनका निधन हो गया .सभी बिलों का भुगतान करने के पश्चात उनकी देह को
मार्चुरी से लाकर हॉस्पिटल के प्रांगण में
रख दिया गया .उनकी पत्नी प्रतीक्षा कर रही थी कि कब शव वाहन को लाया जाय और उनकी
देह को अंतिम संस्कार हेतु अपने शहर ले जाया जाय .देर होते देख वो हॉस्पिटल के गेट
तक आयी तो देखा हॉस्पिटल के लॉन में भीड़ लगी हुई है और भीड़ के अंदर घुस कर जो उसने
देखा तो उसके होश उड़ गए .उसके बेटे ,दामादों और बेटियों में स्वर्गीय मोहन जी की
जायदाद के बटवारे को लेकर गुत्थमगुत्था हो रही थी .यह देखकर तो वो बेहोश होते बची
.वह अपनी सारी उर्जा को एकत्रित करके जोर से चीखी “हराम जादो ,वो तुम्हारे लिए ही
पैसे कमा रहा था,कम से कम उसके अंतिम संस्कार तक तो रुक जाते “ यह सुन कर उनके
बेटे ने गुस्से से अपनी माँ को देखा और एक टैक्सी बुलाकर उसकी डिक्की में श्री
मोहन की बॉडी को ठूसा और माँ को खींच कर उसमे बिठाकर ,अपने शहर रवाना हो गए
.रास्ते भर माँ रोते रोते यही सोचती रही कि उनके पति ने आखिर क्या कमाई की ?क्या
इन्ही बच्चों की ख़ुशी के लिए ही उसके पति यह सब कर रहे थे ?टैक्सी के आगे आगे
एक ट्रक जा रहा था और उसके पीछे लिखा था -
“कैद कर दिया सापों को ये कहकर सपेरे ने.
बस अब इन्सानों को
डसने के लिये उसके अपने ही काफी है”
Very touching and eye opening story indeed.
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ReplyDeleteजब इंसान पैसे को ही सर्वोपरि रखता है तो धन के लोभ में ऐसा भी हो ही सकता है.
ReplyDeleteधन्यवाद.
अवध लाल