Friday, February 13, 2015

मोहपाश

स्मृति और रीता  स्कूल से लौटते समय जब भी बड़े बंगले के सामने से गुजरते ,हमेशा एक कुत्ता उन की और देख कर ख़ुशी से पूंछ हिलाकर भौंकता था। ये दोनों भी उसके सर ,गर्दन पर प्यार से हाथ फेर कर उसके प्यार का उत्तर देती रहती थी। स्मृति और रीता का फ्लैट भी पास में ही था और यह रोज का रूटीन हो चूका था। वास्तव में स्मृति और रीता के घर पर भी कुछ दिन पहले तक एक  कुतिया शैरी हुआ करती थी परन्तु उसका अंत समय बहुत ही खराब बीता। वो अक्सर बीमार हो जाती। एक बार तो उसकी पिछली टांगों में लकवा मार गया ,इन दोनों बहनो ने बहुत सेवा की उसकी। रोज गोद में बिठाकर रिक्शे पर डॉक्टर वार्ष्णेय के पास ले जाना ,टांगों की तेल से मालिश करना आदि। दोनों की मेहनत रंग लाई। अब वो चलने फिरने लगी थी ,परन्तु उसका एनर्जी लेवल कम होता जा रहा था। अब तो हालत यह हो गयी थी की उसके मुंह से लार बहनी शुरू हो गयी थी। उसका कष्ट देखा नहीं जा रहा था। स्मृति  अपने पापा के साथ शैरी  को वेटेरनेरी हॉस्पिटल भी दिखाने ले गयी। वहां पर भी यही बताया गया की इसका अंत समय आ चुका है और यदि आप सबसे इसके कष्ट नहीं देखे जा रहे हैं तो इसकी मर्सी किलिंग करवाई जा सकती है। और फिर डॉक्टर की सलाह को मानते हुए वही करवाना पड़ा। जिस दिन शैरी की मर्सी किलिंग करवाई गयी ,पूरा परिवार रो रहा था और घर में खाना तक नहीं पका। सबसे ज्यादा रोने वालों में थे पापा।
 अब यह कुत्ता फिर से इन दोनों को मोहपाश में बाँध रहा था। इसका नाम था ' स्टेफी  '
एक दिन स्मृति और रीता अपनी बालकनी में बैठे हुए तेज बारिश का आनंद ले रही थीं की अचानक उन्हें पास से किसी कुत्ते के जोर जोर से रोने की आवाज़ आयी ,देखा तो स्टेफी रो रहा था ,गौर से देखा तो पता चला की उसके घर का दरवाज़ा बंद था और वो घनघोर बारिश में भीग रहा है.दोनों बहने तुरंत छाता ले कर स्टेफी के घर की तरफ भागी और घर की बहुत देर तक घंटी बजाने के उपरांत एक युवा औरत बाहर निकली और इनकी ओर प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा . इनके यह पूछने पर कि कुत्ते को बाहर क्यों छोड़ा हुआ है तो उसने बताया कि वो बूढा हो गया है और घर में छोट बच्चे भी हैं इस लिए उसे बाहर छोड़ रखा है .इनके यह पूछने पर कि घर के बड़े बूढों के साथ भी आपके यहाँ यही व्यवहार होता है ,तो वो चुप रही .इन दोनों बहनों के यह धमकाने पर कि अगर स्टेफी आपने तुरंत अंदर नहीं किया तो मजबूर हो कर उन्हें PETA को शिकायत करनी पड़ेगी ,उस युवा औरत ने उस समय स्टेफी को घर के अंदर कर लिया. परन्तु पूरी बरसात में में स्टेफी के साथ यही व्यवहार होता रहा ,थक हारकर इन दोनों बहनों ने एक NGO पीपल फॉर एनिमल को फोन करके मदद मांगी .NGO वालों ने त्वरित एक्शन लेते हुए दो आदमी कुत्ते को लाने के लिए भेज दिए.स्टेफी को NGO वालों ने स्टेफी को काबू में करने की बहुत कोशिश की परन्तु वह इनके साथ जाने के लिए तैयार नहीं था,वह अब भी अपने उस मालिक का वफादार बना हुआ था जिसने उसे घर के बाहर लावारिस छोड़ दिया था.अंत में इन दोनों बहनों की मदद से उसे किसी तरह से एक बोरे में भर कर NGO ले जाया गया.
एक दिन इन दोनों बहनों को स्टेफी की याद आयी ,ये दोनों NGO में गयीं और स्टेफी को ढून्ढ कर उस से मिली .अब वो बहुत ही खुश नज़र आ रह था इन बहनों से कूद कूद कर गले मिल रहा था . इस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे रोमन दास अन्द्रोक्लेस और उस शेर जिसके पंजे से काँटा निकाला था उन दोनों का मिलन हो रहा हो . 

2 comments:

  1. Amazing.... Simple yet so touching... Your stories are like gems.. Each one is a special story in its own way

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