अन्धविश्वास
अन्धविश्वास
बच्चों
के एडमिशन के लिए विभिन्न स्कूलों के फार्म निकल रहे थे ,मुझे भी अपनी छोटी बेटी
का एडमिशन किसी अच्छे स्कूल में करवाना था परन्तु समझ में नहीं आ रहा था कहाँ
करवाएं .एक दिन मेरे एक अधीनस्थ क्लर्क ने
मुझे बताया कि सर ! सैंट गोबैन जो कि शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक था ,के
फार्म निकले हैं और मैं उसे लेने जा रहा हूँ .मैंने कहा कि मुझे भी एक फार्म चाहिए
,तो उसने कहा कि आप को स्वयं ही चलना पड़ेगा .अतः हम दोनों एक ही स्कूटर पर बैठ कर
निकल पड़े .थोड़ी ही दूर चले होंगे कि एक काली बिल्ली हमारा रास्ता काट गयी .यह देख
कर मेरा क्लर्क तो सहम गया और बोला ,सर आज काम नहीं बनेगा .मैंने उस से कहा की
आजकल के वैज्ञानिक युग में भी तुम इन बातों पर विश्वास करते हो ? खैर , किसी तरह
स्कूल पहुचे और देखा कि फार्म लेने वालों की बहुत लम्बी लाइन लगी हुई है .हम भी
लाइन में लग गए और मेरा क्लर्क मेरे पीछे खड़ा हो गया.लगभग आधे घंटे में हमारा भी
नंबर आ गया और बेटी का नाम लिख कर स्कूल क्लर्क ने एक फार्म मुझे इशू कर दिया और
इसके उपरांत स्कूल क्लर्क ने फार्म समाप्त होने की घोषणा भी कर दी .मेरा क्लर्क
बेचारा हतप्रभ ! मैंने स्कूल क्लर्क से बहुत रिक्वेस्ट की कि प्लीज एक फार्म और दे
दे परन्तु स्कूल क्लर्क ने बताया की फार्म वास्तव में समाप्त हो गए हैं और वो कुछ
नहीं कर सकता.यह मात्र एक संयोग था जिसने कि मेरे क्लर्क के बिल्ली
द्वारा रास्ता काटने के अन्धविश्वास को सच कर दिया जबकि बिल्ली ने रास्ता मेरा भी
काटा था.
उस क्लर्क की तरह अनेक लोग तो ऐसा ही मानेगे कि बिल्ली द्वारा रास्ता काटने का अन्धविश्वास उसके लिए सचमुच सच हो गया हमआप तो यही मानेगे कि यह महज एक इत्तेफाक ही हो सक्जता है.
ReplyDeletePosted by r.n.arora at 12:13 AM
This is a just coincidence but it came true in this case. Often, our third sense plays an important role.
ReplyDeleteVery true
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ReplyDeleteWhile it was just a coincidence but it reinforced the belief of the clerk in superstition because he suffered in this event
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