जाड़े का मौसम दस्तक दे रहा था और आज
अच्छी धूप निकली हुई थी। शशि ने सारे गरम कपड़ों को धूप दिखाने के लिए निकाल लिया
और एक एक कपडा उल्टा कर धूप में डालने लगी। अपने पति का एक कोट जैसे ही उल्टा कर
डालने लगी कोट की अंदर की जेब में कुछ होने का आभास हुआ , उसने हाथ डाला ,सौ सौ के दो नोट
! वो नोट उसने बच्चों को दिखाए और कहा पापा को मत बताना। शाम को श्याम ऑफिस से घर
लौटा तो पाया की पत्नी कुछ बदली बदली सी लग रही है। कुछ मुस्कुराती हुई ,कुछ छुपाती हुई।
उसने इस चीज़ को नोटिस तो किया परन्तु अपने में अधिक
व्यस्त होने के कारण बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं दी। रात को सोते समय भी कुछ इसी
प्रकार के भाव पत्नी के चेहरे पर आते हुए देख श्याम से रहा न गया और उसने पूछ ही
लिया। शशि मौन रही। श्याम जानता था कि उसकी पत्नी बहुत ही निश्छल किस्म की औरत थी ,इसलिए चुपचाप सो गया। रात को लगभग दो
बजे श्याम को हलकी सी बिस्तर पर कुछ हलचल सी प्रतीत हुई तो उसने पाया की शशि अभी
तक जाग रही थी। उसे बहुत आश्चर्य हुआ ,उसने पूछा 'क्या हुआ ', तो शशि ने कुछ सकुचाते हुए बताया कि आज सुबह आपके कोट से उसे दो
सौ रूपये मिले हैं !श्याम नींद में नो कंमेंट वाली मुद्रा में था लेकिन यह सुनकर
आँख खोल कर उसने अपनी पत्नी की ओर देखा तो पाया वो गहरी नींद में खर्राटे मार रही
थी। अब वो अपराध बोध से मुक्त थी।
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