ब्रिगेडियर राधे ,रिटायर हो कर अपने निजी घर में
शिफ्ट कर गए थे.ज़िदगी भर आर्मी की सुख सुविधाओं एवं सलूट के उपरांत सिविल जीवन में
सामन्जस्य बिठाने में उन्हें बहुत कठिनाइयाँ हो रही थी.कदम कदम पर हर महकमे जैसे
नगर महापालिका, डाकघर ,टेलीफोन आदि में उनसे या तो डॉलर (रम की बोतल )मांगे जा रहे
थे या सीधे सीधे पैसे .धीरे धीरे सारी चीजों को समझने की कोशिश कर रहे थे.अक्सर घर
की घंटी बजती ,तो पता चलता की टेलीफोन विभाग का लाइन मैन फोन की लाइन स्वयं काट कर
ठीक करने के बाद इस प्रतीक्षा में खड़ा है कि कुछ मिल जाय. इसी बीच होली आ गयी . इस
त्यौहार के बाद तो इनाम लेने वालों की लाइन लग गयी .एक दिन तो हद हो गयी जब डाकिया
ब्रिगेडियर राधे से होली की बक्शीश लेने के लिए आया ,उन्होंने सीधे सीधे उस से
पूछा कि क्या उसे तनख्वाह नहीं मिलती है जो बक्शीश लेने आ गए हो ?उस समय तो वो
चुपचाप चला गया .कुछ दिनों के बाद उन्होंने ने नोटिस किया कि उनकी कोई भी सरकारी
एवं निजी चिठ्ठी नहीं आ रही है जिनकी कि सूचना उनके पास है .उन्होंने डाकिये से
पूछा ,तो उसने टका सा जवाब दे दिया कि उसके पास उनकी कोई चिठ्ठी नहीं है .एक दिन
उन्होंने देखा कि घर के सामने वाली नाली में कुछ कागज़ फटे हुए पड़े हैं
,गौर से देखने पर पता चला की उनकी सभी चिट्ठियां जो की आर्डिनरी पोस्ट से आने वाली
थी ,सब की सब नाली में पड़ी हुई थी.
और एक दिन तो हद ही हो गयी ,लेडी ब्रिगेडियर अपने
किरायेदार जो कि उनके निवास के एक पोर्शन
में ही रहते थे , के पास आयी और कहने लगी की भय्या ब्रिगेडियर साहब को सम्भालो .
पता करने पर मालूम पड़ा कि गली के स्वीपर को नाली ठीक से साफ़ करने को कह दिया .थोड़ी
देर बाद वो कुछ इनाम की आस में गेट पर खड़ा हो गया ,पूछने पर पता चला कि नाली साफ़
कर दी है ,कुछ इनाम बक्शीश मिल जाय . ब्रिगेडियर साहब ने उस स्वीपर को अंदर अपने
कमरे में बुलाया और कुण्डी अंदर से बंद कर के उसकी मिलिट्री बेल्ट से पिटाई शुरू
कर दी .बड़ी मुश्किल से उस गली के स्वीपर को किरायेदार की
सहायता से बचाया जा सका .इस का परिणाम यह हुआ की दुसरे दिन से गली की नाली की सफाई
भी बंद हो गयी और स्वीपर ने इस गली में आना ही बंद कर दिया .कुछ दिनों में गली की
नालियाँ बजबजाने लगी और आसपास के पड़ोसी कारण पता चलने पर इकट्ठे हो कर ब्रिगेडियर
साहब के पास आये और उन्हें समझाया की मिलिटरी की लाइफ और यहाँ की लाइफ में बहुत
अंतर है यहाँ रहना है तो यहाँ के नियमों का पालन भी करना पड़ेगा .यही है यहाँ की जिंदगी
.
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