पार्किन्सन
आदेश जी का पार्किन्सन
काफी बढ़ गया था और उनकी पत्नी को अब उन्हें सम्भालने में बहुत परेशानी हो रही थी.वो
बेचारी प्रतिदिन उनको जबरदस्ती ठेलती हुई घुमाने ले जाया करती थी . आदेश जी के
शरीर में स्टिफनेस बढती जा रही थी . आदेश जी का खाना खाने की भी बहुत इच्छा नहीं
करती थी .इस बीमारी की सबसे बड़ी समस्या तो ब्रेन की ही होती है और धीरे धीरे ब्रेन
और शरीर का सामन्जस्य भी शिथिल होने लगता है .कभी कभी तोउनकी पत्नी उनको ,जब घूमने
या खाना खाने के लिए बोलती तो वो लड़ना शुरू कर देते थे .डॉक्टरों के पास ले जाना
,उनको एक्सरसाइज कराना ,खाना खिलाना ही उनकी पत्नी की पूर्णकालिक दिनचर्या बन गयी
थी .उनकी पत्नी बहुत ही कर्मठ किस्म की नारी थी . सदैव मुस्कुराती रहती ,कभी अपने
पति एवं अपने कष्टों को कभी भी दूसरों से शेयर नहीं करती थी .
आदेश जी के दो
पुत्र थे और दोनों ही विवाहित थे एवं विदेशों में अच्छी जॉब पर लगे हुए थे और उनका
एक पुत्र एवं पुत्र वधु दोनों ही डॉक्टर थे . दोनों बेटों को अपने माता पिता से
बहुत स्नेह था . आदेश जी की पत्नी कभी भी अपने बच्चों को आदेश जी की बीमारी के
बारे में बहुत ज्यादा नहीं बताती थी ,सोचती थी ,की दूर बैठे हुए हैं ,क्यों उनको
कष्ट दिया जाए .एक दिन तो आदेश जी की यह हालत हो गयी कि चलते चलते रास्ते में एक
दम से रुक गए और वहीँ पर पत्नी के सम्भालते सम्भालते गिर गए .किसी प्रकार एक कार
वाले को रोक कर ,उसमे किसी प्रकार बैठा कर घर लाया गया .मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों
से कंसल्ट किया गया ,उन्होंने सारे टेस्ट करने के बाद दवाइयां लिख दी .
इस बीच आदेश जी जिस
अपार्टमेंट में रहते थे ,उसकी सोसाइटी के सेक्रेटरी से उनका हाल देखा नहीं गया और
उसने उनके डॉक्टर बेटे को आदेश जी की गंभीर स्थिति के बारे में सूचित कर दिया
.बेटा बेचारा यह सब सुन कर बहुत परेशान हो गया और तुरंत माँ से बात की और खूब लड़ा
.फिर उसने अपनी डॉक्टर पत्नी से पिता की गंभीर स्थिति की चर्चा की तो उसकी पत्नी
ने तुरंत अपने पति से कहा कि हमारे माँ बाप ने यही दिन देखने के लिए क्या हम लोगों
को पढ़ा लिखा कर बड़ा किया था ,हमें तुरंत कुछ करना चाहिए .उसने अपने पति से कहा हम
लोग विदेशों में डाक्टरी कर रहे है और हमारे माता पिता घर में कष्ट में हों ,यह कोई
अच्छी बात तो नहीं है .पत्नी ने तुरंत अपने हॉस्पिटल से छुट्टी ली ,दिल्ली का
टिकेट कटाया ,और दिल्ली आकर एक एयर एम्बुलेंस का प्रबंध किया और अपने सास ससुर को तैयार
रहने के लिए बोल दिया . एयर एम्बुलेंस का हेलीकाप्टर जैसे ही अपार्टमेंट की छत पर
उतरा ,सब लोग हैरान !जैसे ही पता चला सारे अपार्टमेंट वासी इकट्ठे हो गए .उनकी बहू
ने विशेष रूप से सोसाइटी के सेक्रेटरी को सूचना देने के लिए आभार प्रकट किया .यह
पूछने पर कि आदेश जी का बेटा क्यों नहीं आया ,तो बहू ने बताया वो पापा का हाल सुन
कर रोने लगे ,उनकी हालत देख कर ही मैंने स्वयं आने का निर्णय लिया .यह पूछने पर कि
अब क्या होगा ,तो बहू ने बताया कि विदेश
में जिस शहर में वो लोग रहते हैं वहां के बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट ले
लिया गया है और वहां पहुँचते ही इलाज शुरू हो जाएगा .इलाज के खर्च के बारे में पूछने
पर उसने कहा कि जितने भी पैसे खर्च हो जाएँ इसकी कोई परवाह नहीं .पैसा क्या माता
पिता से बढ़ कर होता है .
एयर एम्बुलेंस का
हेलीकाप्टर आदेश जी ,उनकी पत्नी व बहू को
लेकर जैसे ही उड़ने को हुआ ,सभी अपार्टमेंट वासियों ने शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की
कामनाएं देते हुए उन्हें बिदा किया .उस समय सब के होठों पर एक ही बात थी “ऐसे बेटा
बहू सब को दे “
इस बार जब होली के
उत्सव पर सभी अपार्टमेंट वासी एकत्र हुए तो सोसाइटी के सेक्रेटरी ने सबको अवगत
कराया कि विदेश में आदेश जी के ब्रेन की अत्याधुनिक विधि से सर्जरी करके एक स्टेंट
लगा दिया गया है जिससे कि उनका पार्किन्सन लगभग ठीक हो गया है .उन्होंने यह भी बताया
की आदेश जी अपने बेटे बहू नाती पोतों के साथ बहुत खुश हैं . सोसाइटी के सेक्रेटरी
ने इस मौके पर बेटे पर लिखी निम्न चार पंक्तियाँ भी सुनाई-
“ पिता के कंधो पर बैठ कर दुनिया को समझती जिज्ञासा है बेटे,
तो कभी
बूढ़े पिता को दवा, सहारा, सेवा सुश्रुषा है बेटे,
पिता का
अथाह विश्वास और परिवार का अभिमान है बेटे,
भले कितने
ही शैतान हो पर घर की पहचान है बेटे.”