‘ लियो’
एक विडिओ देख रहा था ,जिसमे कुत्ते
अपने मालिकों को अपने विभिन्न करतबों से जगा रहे थे.इस पर मुझे भी याद आया कि हमारे पास भी एक जर्मन स्पिट्ज कुत्ता था जिसका नाम हमने लियो रखा था .बहुत ही
संवेदन शील था वो.ऑफिस से लौटते समय जब मेरा स्कूटर घर से लगभग एक किलोमीटर होता
था तो उसे मेरे आने का आभास हो जाता था और जब मैं घर पहुंचता तो वो जोर जोर से
पूंछ हिलाकर,मुझसे उछल उछल कर लिपट कर अपना प्यार जताता .जब कभी भी घर के सभी
सदस्यों को उसे छोड़ कर जाना होता तो वह बहुत रोता और वापस आने पर बहुत नाराज़ होता.
फिर उसको मनाने का हमारे पास एक ही तरीका होता ,उसके प्रिय व्यंजन आमलेट और पापड़ ,वही
उसे दिए जाते तब वह मानता. वो कभी कभी तो बच्चों के साथ स्कूल की क्लास में भी चला
जाता .उस से जुडी हुई जीवन की अनेक घटनाएं /अनुभव हैं जिन्हें हम आज भी याद करते
हैं.उस से जुडी हुई एक घटना याद आ रही है कि मेरी पत्नी को स्नोफिलिया हो गया था
और उसे सांस लेने में बहुत समस्या हो रही थी .बेचारी रात रात भर जगती रहती . कई
डाक्टरों को दिखाया ,बहुत फर्क नहीं पड़ रहा था .मेरी नींद में कोई बाधा ना पड़े इस
लिए वो कभी कभी दुसरे बेडरूम में सोने चली जाती थी .एक रात की बात है कि लियो
अचानक रात को मेरी चादर खीच कर मुझे जगाने का प्रयास कर रहा था और जब तक उसने मुझे
जगा नहीं लिया तब तक उसने दम नहीं लिया .मैं जब उठ कर बैठ गया तो वो भौंक भौंक कर दूसरे
कमरे की ओर इशारा कर रहा था . इस बीच मैंने देखा की पत्नी अपने बेड पर नहीं है तो
मैं दूसरे कमरे की ओर भागा और देखा की पत्नी को सांस नहीं आ रही है और वो रोये जा
रही थी .तुरंत किसी प्रकार पत्नी को रात को ही होस्पिटलाइज़ किया और किसी प्रकार
उसकी जान बचाई .आज मैं सोचता हूँ कि शायद उस दिन लियो ने मुझे जगाया ना होता ना
जाने क्या अनर्थ हो जाता .इस बारे में मैं एक ही बात कह सकता हूँ .
“वो यहाँ पर हमारी जिंदगी का शायद एक
हिस्सा था ,लेकिन हम तो उसकी पूरी जिंदगी ही थे “(He might
only be here for a part of our life but for him we were his whole life)
रवीन्द्र नाथ अरोड़ा
nice and touching
ReplyDeleteबहुत बढ़िया.
ReplyDeleteअति सुंदर. जीवन के यह छोटे छोटे संस्मरण अतीत के पृष्ठ खोल देते हैं...
ReplyDeleteइसीलिए तो कुत्ता वफादारी की मिसाल कहलाता है
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